📌 संक्षिप्त उत्तर: महर्षि पतंजलि के अनुसार चित्त वृत्तियाँ पाँच प्रकार की होती हैं — प्रमाण, विपर्यय, विकल्प, निद्रा और स्मृति। ये पाँचों वृत्तियाँ क्लेशकारक और अक्लेशकारक दोनों प्रकार की होती हैं। योग का लक्ष्य इन्हीं वृत्तियों का निरोध करना है।
योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः
— पतंजलि योगसूत्र (1.2)
अर्थ: चित्त की वृत्तियों का निरोध (रोक देना) ही योग है।

चित्त क्या है — What is Chitta in Hindi
सरल अर्थों में कहें तो चित्त वह स्थान है जहाँ हमारे विचार जन्म लेते हैं, बनते हैं और संस्कारों के रूप में जमे रहते हैं। चित्त एक प्रकार की भूमि है — एक आधार — जिस पर हमारे सभी विचार, भावनाएँ और अनुभव अंकित होते हैं।
महर्षि पतंजलि ने अपने योगसूत्र में चित्त को तीन घटकों से निर्मित बताया है:
- मन (Manas) — इंद्रियों से आने वाली सूचनाओं को ग्रहण करता है
- बुद्धि (Buddhi) — निर्णय और विवेक का केंद्र
- अहंकार (Ahamkara) — “मैं” की भावना का केंद्र
जब चित्त विभिन्न रूप लेता है — यानी जब मन में अलग-अलग विचार, भावनाएँ और अनुभव उठते हैं — तो उन्हें चित्त वृत्तियाँ कहते हैं।
वृत्ति क्या है — What is Vritti in Hindi
वृत्ति का शाब्दिक अर्थ है — मन की वह अवस्था या लहर जिसमें वह वर्तमान में सक्रिय है। जैसे तालाब का पानी जब हिलता है तो लहरें उठती हैं, उसी प्रकार जब चित्त किसी विचार, भाव या अनुभव से प्रभावित होता है तो उसमें वृत्तियाँ उत्पन्न होती हैं।
महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र के पाँचवें सूत्र में कहा है:
वृत्तयः पञ्चतय्यः क्लिष्टाक्लिष्टाः
— पतंजलि योगसूत्र (1.5)
अर्थ: वृत्तियाँ पाँच प्रकार की हैं — क्लेशकारक (दुःखदायी) और अक्लेशकारक (सुखकारक)।
मन हमेशा इन पाँचों वृत्तियों में से किसी न किसी में उलझा रहता है। जब तक ये वृत्तियाँ सक्रिय रहती हैं तब तक सच्चा योग संभव नहीं है।
चित्त वृत्तियों के पाँच प्रकार — 5 Types of Chitta Vritti in Hindi
महर्षि पतंजलि ने चित्त की पाँच मुख्य वृत्तियाँ बताई हैं:
| क्रम | वृत्ति | अर्थ | प्रकार |
|---|---|---|---|
| 1 | प्रमाण | सही ज्ञान / प्रमाणिक जानकारी | अक्लेशकारक |
| 2 | विपर्यय | गलत ज्ञान / मिथ्या धारणा | क्लेशकारक |
| 3 | विकल्प | कल्पना / शब्द आधारित भ्रम | क्लेशकारक या अक्लेशकारक |
| 4 | निद्रा | नींद / अभाव का अनुभव | अक्लेशकारक |
| 5 | स्मृति | स्मरण / पुरानी यादें | क्लेशकारक या अक्लेशकारक |
1. प्रमाण वृत्ति — Pramana Vritti in Hindi
परिभाषा: प्रमाण वृत्ति वह अवस्था है जिसमें मन को सही और प्रमाणित ज्ञान प्राप्त होता है। यह ज्ञान तीन स्रोतों से मिलता है — प्रत्यक्ष, अनुमान और आगम।
महर्षि पतंजलि के अनुसार प्रमाण के तीन प्रकार हैं:
- प्रत्यक्ष (Pratyaksha): इंद्रियों से प्राप्त सीधा ज्ञान। जैसे — आँखों से देखना, कानों से सुनना। उदाहरण: हम आग को देखते हैं और जानते हैं कि वह गर्म है।
- अनुमान (Anumana): तर्क और अनुमान से प्राप्त ज्ञान। उदाहरण: पहाड़ पर धुआँ दिखे तो हम अनुमान करते हैं कि वहाँ आग है।
- आगम (Agama): शास्त्रों, गुरु या विश्वसनीय स्रोत से प्राप्त ज्ञान। उदाहरण: वेद, उपनिषद या गुरु के वचन।
💡 वास्तविक जीवन उदाहरण: यदि आप किसी व्यक्ति को रोते हुए देखते हैं और समझ लेते हैं कि उसके जीवन में कोई अप्रिय घटना घटी है — यह अनुमान प्रमाण है।
2. विपर्यय वृत्ति — Viparyaya Vritti in Hindi
परिभाषा: विपर्यय वह वृत्ति है जिसमें मन किसी वस्तु या व्यक्ति के बारे में गलत धारणा बना लेता है — और वह गलत ज्ञान सच्चाई का रूप ले लेता है।
यह मन की सबसे भ्रामक वृत्ति है। इसमें हम जो देखते या सोचते हैं वह वास्तविकता से भिन्न होता है, किन्तु हम उसे सत्य मान लेते हैं।
योगसूत्र में कहा गया है:
विपर्ययो मिथ्याज्ञानमतद्रूपप्रतिष्ठम्
— पतंजलि योगसूत्र (1.8)
अर्थ: विपर्यय वह मिथ्या ज्ञान है जो वास्तविक रूप पर आधारित नहीं है।
💡 वास्तविक जीवन उदाहरण: रात के अंधेरे में रस्सी को सांप समझ लेना — यह विपर्यय है। इसी प्रकार किसी व्यक्ति के बारे में बिना पूरी जानकारी के गलत राय बना लेना भी विपर्यय है।
3. विकल्प वृत्ति — Vikalpa Vritti in Hindi
परिभाषा: विकल्प वह वृत्ति है जिसमें मन केवल शब्दों या कल्पनाओं के आधार पर विचार बनाता है — जिनका वास्तविकता में कोई ठोस आधार नहीं होता।
विकल्प वृत्ति में मन एक ऐसी दुनिया बनाता है जो केवल शब्दों और कल्पनाओं पर टिकी होती है। यह दिवास्वप्न, भविष्य की चिंता, या निराधार विचारों का क्षेत्र है।
योगसूत्र में कहा गया है:
शब्दज्ञानानुपाती वस्तुशून्यो विकल्पः
— पतंजलि योगसूत्र (1.9)
अर्थ: जो ज्ञान केवल शब्दों पर आधारित हो और जिसका कोई वास्तविक आधार न हो — वह विकल्प वृत्ति है।
💡 वास्तविक जीवन उदाहरण: “अगर मेरे पास बहुत पैसा होता तो मैं बहुत खुश होता” — यह विकल्प वृत्ति है। इसी प्रकार किसी काम के बारे में बिना शुरू किए ही “मैं यह नहीं कर सकता” सोचना भी विकल्प है।
4. निद्रा वृत्ति — Nidra Vritti in Hindi
परिभाषा: निद्रा वह वृत्ति है जिसमें मन अभाव का अनुभव करता है — अर्थात् चेतना अस्थायी रूप से बंद हो जाती है। यह केवल नींद नहीं बल्कि एक योगिक अवस्था है।
पतंजलि की दृष्टि में निद्रा केवल शारीरिक नींद नहीं है। यह एक मानसिक अवस्था है जहाँ चित्त में किसी भी विषय का अभाव होता है। इसीलिए इसे भी एक वृत्ति माना गया है।
अभावप्रत्ययालम्बना वृत्तिर्निद्रा
— पतंजलि योगसूत्र (1.10)
अर्थ: अभाव के अनुभव पर आधारित वृत्ति निद्रा है।
💡 महत्वपूर्ण बात: जब हम नींद से जागकर कहते हैं “आज बहुत अच्छी नींद आई” — तो यह निद्रा का अनुभव स्मृति में अंकित होना है। इसीलिए निद्रा को भी चित्त की एक वृत्ति माना जाता है।
5. स्मृति वृत्ति — Smriti Vritti in Hindi
परिभाषा: स्मृति वह वृत्ति है जिसमें मन पुराने अनुभवों को याद करता है — और उन्हें वर्तमान में जीवित कर देता है। यह सभी वृत्तियों का आधार है।
स्मृति वृत्ति सबसे शक्तिशाली वृत्ति है। हमारे सभी पूर्व अनुभव, संस्कार और भावनाएँ इसी में संग्रहीत रहती हैं। जब हम किसी पुरानी घटना को याद करते हैं — चाहे वह सुखद हो या दुःखद — तो यह स्मृति वृत्ति है।
अनुभूतविषयासम्प्रमोषः स्मृतिः
— पतंजलि योगसूत्र (1.11)
अर्थ: पहले अनुभव किए गए विषयों का स्मरण स्मृति है।
💡 वास्तविक जीवन उदाहरण: बचपन की कोई घटना याद आना, किसी पुरानी गलती का पछतावा, या पुरानी खुशी का स्मरण — ये सभी स्मृति वृत्ति के उदाहरण हैं।
चित्त की पाँच भूमियाँ — Five States of Chitta (Chitta Bhumis)
महर्षि पतंजलि ने चित्त वृत्तियों के साथ-साथ चित्त की पाँच भूमियाँ (अवस्थाएँ) भी बताई हैं। यह वह अवस्थाएँ हैं जिनमें मन रह सकता है:
| भूमि | अर्थ | विशेषता | योग संभव |
|---|---|---|---|
| क्षिप्त | चंचल मन | मन हर तरफ भटकता है | ❌ नहीं |
| मूढ़ | जड़ मन | आलस्य, नींद, भारीपन | ❌ नहीं |
| विक्षिप्त | कभी-कभी स्थिर | कभी एकाग्र, कभी भटकता है | ❌ नहीं |
| एकाग्र | केंद्रित मन | एक विषय पर स्थिर | ✅ हाँ |
| निरुद्ध | वृत्तिरहित मन | सभी वृत्तियाँ शांत | ✅ सर्वोच्च |
पतंजलि के अनुसार पहली तीन भूमियों में योग संभव नहीं है। केवल एकाग्र और निरुद्ध अवस्था में ही सच्चा योग हो सकता है।
चित्त वृत्तियों का निरोध कैसे करें — How to Control Chitta Vrittis
पतंजलि ने योगसूत्र में चित्त वृत्तियों के निरोध के लिए दो मुख्य उपाय बताए हैं:
1. अभ्यास (Abhyasa)
मन को बार-बार एक विषय पर लाने का निरंतर प्रयास। यह दीर्घकालिक, निरंतर और श्रद्धापूर्वक किया जाने वाला अभ्यास है। नियमित ध्यान, प्राणायाम और योगासन अभ्यास के प्रमुख माध्यम हैं।
2. वैराग्य (Vairagya)
सांसारिक विषयों के प्रति अनासक्ति। इसका अर्थ संसार का त्याग नहीं — बल्कि संसार में रहते हुए भी किसी वस्तु, व्यक्ति या परिणाम में अत्यधिक आसक्त न होना।
3. अष्टांग योग का अभ्यास
यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि — इन आठ अंगों का नियमित अभ्यास चित्त वृत्तियों को धीरे-धीरे शांत करता है।
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चित्त वृत्तियों को समझने के साथ इन योगिक विषयों का अध्ययन भी करें:
- सूर्य नमस्कार — 12 मुद्राएँ, विधि और लाभ
- चंद्र नमस्कार — 14 मुद्राएँ, विधि और लाभ
- उड्डियान बंध — विधि, लाभ और सावधानियां
- प्लाविनी प्राणायाम — विधि और लाभ
- वीरभद्रासन — विधि, प्रकार और लाभ
सामान्य प्रश्न (FAQ) — Chitta Vritti in Hindi
प्रश्न 1: चित्त वृत्तियाँ कितने प्रकार की होती हैं?
महर्षि पतंजलि के अनुसार चित्त वृत्तियाँ पाँच प्रकार की होती हैं — प्रमाण, विपर्यय, विकल्प, निद्रा और स्मृति। ये पाँचों वृत्तियाँ क्लेशकारक और अक्लेशकारक दोनों रूपों में हो सकती हैं।
प्रश्न 2: योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः का अर्थ क्या है?
यह पतंजलि योगसूत्र का दूसरा सूत्र है जिसका अर्थ है — “चित्त की वृत्तियों का निरोध (रोक देना) ही योग है।” योग का मूल लक्ष्य मन की इन पाँच वृत्तियों को शांत करना है।
प्रश्न 3: प्रमाण और विपर्यय में क्या अंतर है?
प्रमाण सही और प्रमाणित ज्ञान है जो प्रत्यक्ष, अनुमान या आगम से मिलता है। विपर्यय गलत ज्ञान है जो वास्तविकता से भिन्न होता है — जैसे रस्सी को सांप समझना।
प्रश्न 4: चित्त वृत्तियों का निरोध कैसे करें?
पतंजलि ने दो मुख्य उपाय बताए हैं — अभ्यास (निरंतर मन को एकाग्र करने का प्रयास) और वैराग्य (सांसारिक विषयों के प्रति अनासक्ति)। इसके साथ अष्टांग योग का नियमित अभ्यास भी सहायक है।
प्रश्न 5: चित्त की कितनी भूमियाँ हैं?
पतंजलि ने चित्त की पाँच भूमियाँ बताई हैं — क्षिप्त, मूढ़, विक्षिप्त, एकाग्र और निरुद्ध। इनमें से केवल एकाग्र और निरुद्ध अवस्था में ही योग संभव है।
प्रश्न 6: विकल्प वृत्ति क्या है?
विकल्प वह वृत्ति है जिसमें मन केवल शब्दों या कल्पनाओं के आधार पर विचार बनाता है — जिनका वास्तविकता में कोई ठोस आधार नहीं होता। यह दिवास्वप्न और निराधार चिंताओं का क्षेत्र है।
प्रश्न 7: पतंजलि योगसूत्र में चित्त वृत्तियों का क्या महत्व है?
पतंजलि योगसूत्र में चित्त वृत्तियाँ योग की नींव हैं। जब तक ये वृत्तियाँ सक्रिय रहती हैं तब तक मन अशांत रहता है। इन्हीं वृत्तियों को समझकर और निरुद्ध करके योगी समाधि की अवस्था तक पहुँचता है।
यह लेख शैक्षणिक और आध्यात्मिक जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। पतंजलि योगसूत्र का गहन अध्ययन किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में करना सर्वोत्तम है।







